zindagi

*ज़िन्दगी से लम्हे चुरा*
*बटुए मे रखता रहा!*

*फुरसत से खरचूंगा*
*बस यही सोचता रहा।*

*उधड़ती रही जेब*
*करता रहा तुरपाई*

*फिसलती रही खुशियाँ*
*करता रहा भरपाई।*

*इक दिन फुरसत पायी*
*सोचा …….*
*खुद को आज रिझाऊं*
*बरसों से जो जोड़े*
*वो लम्हे खर्च आऊं।*

*खोला बटुआ..लम्हे न थे*
*जाने कहाँ रीत गए!*

*मैंने तो खर्चे नही*
*जाने कैसे बीत गए !!*

*फुरसत मिली थी सोचा*
*खुद से ही मिल आऊं।*

*आईने में देखा जो*
*पहचान ही न पाऊँ।*

*ध्यान से देखा बालों पे*
*चांदी सा चढ़ा था,*

*था तो मुझ जैसा*
*जाने कौन खड़ा था।*

really very nice

*Really Very Nice*
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जो चाहा
कभी पाया नहीं,

जो पाया
कभी सोचा नहीं,

जो सोचा
कभी मिला नहीं,

जो मिला
रास आया नहीं,

जो खोया
वो याद आता है,n

पर जो पाया
संभाला जाता नहीं ,

क्यों
अजीब सी पहेली है ज़िन्दगी,

जिसको
कोई सुलझा पाता नहीं…

जीवन में
कभी समझौता करना पड़े
तो कोई बड़ी बात नहीं है,

क्योंकि,

झुकता वही है
जिसमें जान होती है,

अकड़ तो
मुरदे की पहचान होती है।

ज़िन्दगी जीने के
दो तरीके होते है!

पहला:
जो पसंद है
उसे हासिल करना सीख लो.!

दूसरा:
जो हासिल है
उसे पसंद करना सीख लो.!

जिंदगी जीना
आसान नहीं होता;

बिना संघर्ष
कोई महान नहीं होता.!

जिंदगी
बहुत कुछ सिखाती है;

कभी हंसती है
तो कभी रुलाती है;

पर जो हर हाल में खुश रहते हैं;

जिंदगी उनके आगे
सर झुकाती है।

चेहरे की हंसी से
हर गम चुराओ;

बहुत कुछ बोलो
पर कुछ ना छुपाओ;

खुद ना रूठो कभी
पर सबको मनाओ;

राज़ है ये जिंदगी का
बस जीते चले जाओ।

“गुजरी हुई जिंदगी
कभी याद न कर,

तकदीर मे जो लिखा है
उसकी फर्याद न कर…

जो होगा वो होकर रहेगा,

तु कल की फिकर मे
अपनी आज की हसी
बर्बाद न कर…

हंस मरते हुये भी गाता है
और मोर नाचते हुये भी
रोता है….

ये जिंदगी का फंडा है बॉस

दुखो वाली रात
निंद नही आती

और खुशी वाली रात
कौन सोता है…
🌾🌾🌾
ईश्वर का दिया
कभी अल्प नहीं होता;

जो टूट जाये
वो संकल्प नहीं होता;

हार को
लक्ष्य से दूर ही रखना;

क्योंकि जीत का
कोई विकल्प नहीं होता।
🌾🌾🌾
जिंदगी में दो चीज़ें
हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं :

“सांस और साथ”

सांस टूटने से तो
इंसान 1 ही बार मरता है;

पर किसी का साथ टूटने से
इंसान पल-पल मरता है।
🌾🌾🌾
जीवन का
सबसे बड़ा अपराध –

किसी की आँख में आंसू
आपकी वजह से होना।

और जीवन की
सबसे बड़ी उपलब्धि –

किसी की आँख में आंसू
आपके लिए होना।
🌾🌾🌾
जिंदगी जीना
आसान नहीं होता;

बिना संघर्ष
कोई महान नहीं होता;

जब तक न पड़े
हथोड़े की चोट;

पत्थर भी
भगवान नहीं होता।
🌾🌾🌾
जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ
ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं।,

क्योंकि जरुरत तो
फकीरों की भी पूरी हो जाती है;

और ख्वाहिशें बादशाहों की भी
अधूरी रह जाती है।
🌾🌾🌾

मनुष्य सुबह से शाम तक
काम करके उतना नहीं थकता;

जितना क्रोध और चिंता से
एक क्षण में थक जाता है।
🌾🌾🌾
दुनिया में
कोई भी चीज़ अपने आपके लिए
नहीं बनी है।

जैसे: दरिया
खुद अपना पानी नहीं पीता।

पेड़ –
खुद अपना फल नहीं खाते।

सूरज –
अपने लिए हररात नहीं देता।

फूल –
अपनी खुशबु
अपने लिए नहीं बिखेरते।

मालूम है क्यों?

क्योंकि दूसरों के लिए ही
जीना ही असली जिंदगी है।
🌾🌾🌾
मांगो
तो अपने रब से मांगो;

जो दे तो रहमत
और न दे तो किस्मत;

लेकिन दुनिया से
हरगिज़ मत माँगना;

क्योंकि दे तो एहसान
और न दे तो शर्मिंदगी।
🌾🌾🌾
कभी भी
‘कामयाबी’ को दिमाग

और ‘नकामी’ को दिल में
जगह नहीं देनी चाहिए।

क्योंकि,

कामयाबी
दिमाग में घमंड
और नकामी दिल में
मायूसी पैदा करती है।
🌾🌾🌾
कौन देता है
उम्र भर का सहारा।,

लोग तो जनाज़े में भी
कंधे बदलते रहते हैं।
🌾🌾🌾
कोई व्यक्ति
कितना ही महान क्यों न हो,

आंखे मूंदकर
उसके पीछे न चलिए।

यदि ईश्वर की
ऐसी ही मंशा होती
तो वह हर प्राणी को
आंख,
नाक,
कान,
मुंह,
मस्तिष्क आदि क्यों देता?

🙏
अच्छा लगा तो
share जरुर करे !

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🌷Nice Lines🌷
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पानी से
तस्वीर कहा बनती है,

ख्वाबों से
तकदीर कहा बनती है,

किसी भी रिश्ते को
सच्चे दिल से निभाओ,

ये जिंदगी
फिर वापस कहा मिलती है,

कौन किस से
चाहकर दूर होता है,

हर कोई अपने हालातों से
मजबूर होता है,

हम तो
बस इतना जानते है,

हर रिश्ता “मोती”
और हर दोस्त
“कोहिनूर” 💎 होता है।
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☘🌷Best logo🌷☘
☘🌷 ko bhego🌷☘
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Most and More.

People are anxious of what’s coming,

Thinking about it as one important race,

Will they be able to get through?

Are they willing to embrace!

The country guy expects a change in the weather,

The corporate one expects a hike,

The beggar wants to get out of his shack,

While the godmen are still trying to flack their act.

Crops flourished for the country guy,

Promotion was cherry on the cake with the hike,

A furnished flat was waiting for him,

While the godmen still in jail with a grim.

All of them got what they craved for,

Little happiness was seen on their face,

It is in the nature of humans to expect more,

For they aren’t satisfied even with the most.

धूप और छांव

*कामयाबी के सफ़र में धूप बड़ी काम आयी……*

*छाँव अगर होती तो कबके सो गए होते !!*

मैं, मैं हूँ । मैं ही रहूँगी।

🌹एक बेहद खूबसूरत कविता मिली पता नहीं किसकी है
गौर फरमाएं——

मैं, मैं हूँ । मैं ही रहूँगी।
मै , *राधा*नहीं बनूंगी,
मेरी प्रेम कहानी में,
किसी और का पति हो,
रुक्मिनी की आँख की
किरकिरी मैं क्यों बनूंगी
मैं राधा नहीं बनूँगी।

मै *सीता* नहीं बनूँगी,
मै अपनी पवित्रता का,
प्रमाणपत्र नहीं दूँगी
आग पे नहीं चलूंगी
वो क्या मुझे छोड़ देगा
मै ही उसे छोड़ दूँगी,
मै सीता नहीं बनूँगी

ना मैं *मीरा* ही बनूंगी,
किसी मूरत के मोह मे,
घर संसार त्याग कर,
साधुओं के संग फिरूं
एक तारा हाथ लेकर,
छोड़ ज़िम्मेदारियाँ
मैं नहीं मीरा बनूंगी।

*यशोधरा* मैं नहीं बनूंगी
छोड़कर जो चला गया
कर्तव्य सारे त्यागकर
ख़ुद भगवान बन गया,
ज्ञान कितना ही पा गया,
ऐसे पति के लिये
मै पतिव्रता नहीं बनूंगी
यशोधरा मैं नहीं बनूंगी।

*उर्मिला* भी नहीं बनूँगी
पत्नी के साथ का
जिसे न अहसास हो
पत्नी की पीड़ा का ज़रा भी
जिसे ना आभास हो
छोड़ वर्षों के लिये
भाई संग जो हो लिया
मैं उसे नहीं वरूंगी
उर्मिला मैं नहीं बनूँगी।

मैं *गाँधारी* नहीं बनूंगी
नेत्रहीन पति की आँखे बनूंगी
अपनी आँखे मूंदलू
अंधेरों को चूमलू
ऐसा अर्थहीन त्याग
मै नहीं करूंगी
मेरी आँखो से वो देखे
ऐसे प्रयत्न करती रहूँगी
मैं गाँधारी नहीं बनूँगी।

*मै उसीके संग जियूंगी, जिसको मन से वरूँगी,*
पर उसकी ज़्यादती
मैं नहीं कभी संहूंगी
*कर्तव्य सब निभाऊँगी लेकिन, बलिदान के नाम पर मैं यातना नहीं सहूँगी*
*मैं मैं हूँ, *और मैं ही रहुँगी*

रिश्ते

🐋
*हरिवंशराय बच्चन जी की एक सुंदर कविता*

_ख्वाहिश नहीं मुझे_
_मशहूर होने की,

_आप मुझे पेहचानते हो_
_बस इतना ही काफी है._

_अच्छे ने अच्छा और_
_बुरे ने बुरा जाना मुझे,_

_क्यों की जिसकी जितनी जरूरत थी_
_उसने उतना ही पहचाना मुझे._

_जिन्दगी का फलसफा भी_
_कितना अजीब है,_

_शामें कटती नहीं और_
_साल गुजरते चले जा रहें है._

_एक अजीब सी_
_दौड है ये जिन्दगी,_

_जीत जाओ तो कई_
_अपने पीछे छूट जाते हैं और_

_हार जाओ तो_
_अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं._

_बैठ जाता हूँ_
_मिट्टी पे अकसर,_

_क्योंकी मुझे अपनी_
_औकात अच्छी लगती है._

_मैंने समंदर से_
_सीखा है जीने का सलीका,_

_चुपचाप से बहना और_
_अपनी मौज मे रेहना._

_ऐसा नहीं की मुझमें_
_कोई ऐब नहीं है,_

_पर सच कहता हूँ_
_मुझमें कोई फरेब नहीं है._

_जल जात है मेरे अंदाज से_
_मेरे दुश्मन,_

_क्यों की एक मुद्दत से मैंने,
…. न मोहब्बत बदली
और न दोस्त बदले हैं._

_एक घडी खरीदकर_
_हाथ मे क्या बांध ली_

_वक्त पीछे ही_
_पड गया मेरे._

_सोचा था घर बना कर_
_बैठुंगा सुकून से,_

_पर घर की जरूरतों ने_
_मुसाफिर बना डाला मुझे._

_सुकून की बात मत कर_
_ऐ गालिब,_

_बचपन वाला इतवार_
_अब नहीं आता._

_जीवन की भाग दौड मे_
_क्यूँ वक्त के साथ रंगत खो जाती है ?_

_हँसती-खेलती जिन्दगी भी_
_आम हो जाती है._

_एक सवेरा था_
_जब हँसकर उठते थे हम,_

_और आज कई बार बिना मुस्कुराये_
_ही शाम हो जाती है._

_कितने दूर निकल गए_
_रिश्तों को निभाते निभाते,_

_खुद को खो दिया हम ने_
_अपनों को पाते पाते._

_लोग केहते है_
_हम मुस्कुराते बहुत है,_

_और हम थक गए_
_दर्द छुपाते छुपाते._

_खुश हूँ और सबको_
_खुश रखता हूँ,_

_लापरवाह हूँ फिर भी_
_सब की परवाह करता हूँ._

_मालूम है_
_कोई मोल नहीं है मेरा फिर भी_

_कुछ अनमोल लोगों से_
_रिश्ता रखता हूँ._

🙏🏻👬👭👫👬
💐🌺🌹GOOD DAY 💐🌺🌹

दर्द

“””” न “आँखों” से “छलकते” हैं, न “कागज” पर “उतरते” हैं”..
कुछ “दर्द” ऐसे भी होते हैं जो बस “भीतर” ही “पलते” हैं”…!!!

यूं चाहत उभार के

चले दिल की ख़्वाहिशों में
ये चंद दिन गुज़ार के
भला दिल को क्या मिलेगा,
यूँ चाहत उभार के

खिली-खिली चाँदनी थी
खिली-खिली रात भी
जागे-जागे ख़्वाब भी थे
जागी-जागी रात भी
खुले-खुले आसमाँ में
तारे हज़ार थे
भला दिल को क्या मिलेगा,
यूँ चाहत उभार के

करें जुस्तजू भी क्या हम
करें आरज़ू भी क्या
मेरी जान-ऐ-जां बता दो
करें गुफ़्तगू भी क्या
बढ़े सूने रास्तों में
सब कुछ हार के
भला दिल को क्या मिलेगा
यूँ चाहत उभार के

गुलों को तलाशते थे
बहारों के बाद भी
सूने-सूने रास्तों में
किया इंतज़ार ही
ढले यूँ ही ख़ाब मेरे
सब कुछ उजाड़ के
भला दिल को क्या मिलेगा
चाहत उभार के

चले दिल की ख़्वाहिशों में
ये चंद दिन गुज़ार के
भला दिल को क्या मिलेगा
चाहत उभार के

{ निर्मला त्रिवेदी }
26-5-2018
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