ख़रीदार

उँगलियाँ टूट गयीं पत्थर तराशते तराशते!!
जब बनी सूरत यार की,तो ख़रीदार आ गये!!

मिला वो भी नही करते मिला हम भी नही करते

मिला वो भी नही करते
मिला हम भी नही करते

दगा वो भी नही करते
दगा हम भी नही करते

उन्हे रुसवाई का दुख
हमे तन्हाई का डर

गिला वो भी नही करते
शिकवा हम भी नही करते

किसी मोड़ पर
मुलाकात हो जाती है अक्सर

रुका वो भी नही करते
ठहरा हम भी नही करते

– नामालूम

बांसुरी से सीख..

बांसुरी से सीख ले एक नया सबक . . . . .
ऐ जिन्दगी-
लाख सीने में जख्म हो फिर भी गुनगुनाती है..!!