ख़रीदार

उँगलियाँ टूट गयीं पत्थर तराशते तराशते!!
जब बनी सूरत यार की,तो ख़रीदार आ गये!!

मिला वो भी नही करते मिला हम भी नही करते

मिला वो भी नही करते
मिला हम भी नही करते

दगा वो भी नही करते
दगा हम भी नही करते

उन्हे रुसवाई का दुख
हमे तन्हाई का डर

गिला वो भी नही करते
शिकवा हम भी नही करते

किसी मोड़ पर
मुलाकात हो जाती है अक्सर

रुका वो भी नही करते
ठहरा हम भी नही करते

– नामालूम

बांसुरी से सीख..

बांसुरी से सीख ले एक नया सबक . . . . .
ऐ जिन्दगी-
लाख सीने में जख्म हो फिर भी गुनगुनाती है..!!

एँ जिन्दगी मैं तुझसे क्या चाहता हूं

A few thoughts,…

एँ जिन्दगी मैं तुझसे क्या चाहता हूं, असमंजस में हूं अब क्या चाहता हूं.

कभी शहर से शहर पल में पहुंचना चाहता हूं, कभी सड़क के लिए पेड़ कटने से रोकना चाहता हूं.

कभी बिजली न रहने पर क्रोधित हो जाता हूँ, कभी अंधेरे में जुगनू पकड़ना चाहता हूं. 

एँ जिन्दगी मैं तुझसे क्या चाहता हूं, असमंजस में हूं अब क्या चाहता हूं.

कभी वातानुकूलित वातावरण में ही रहना चाहता हूं, कभी सिर्फ ताज़ी हवा को ही पाना चाहता हूं. 

कभी फोन पर तकनीक का मज़ा चाहता हूं, कभी सिर्फ अपनो के संग बतियाना चाहता हूं.

एँ जिन्दगी मैं तुझसे क्या चाहता हूं, असमंजस में हूं अब क्या चाहता हूं.

कभी दुनिया की खबर बस पल में चाहता हूं, कभी अलगावादी अफवाह को फैलने से रोकना चाहता हूं. 

कभी रोज की भागदौड़ में आगे निकलना चाहता हूं, कभी सिर्फ धीरे धीरे साइकिल चलाना चाहता हूं. 

एँ जिन्दगी मैं तुझसे क्या चाहता हूं, असमंजस में हूं अब क्या चाहता हूं.

कभी बड़ो की तरह सारे निर्णय लेना चाहता हूं, कभी बेपरवाह, बेखबर, सिर्फ बचपना बिताना चाहता हूं. 

कभी पैसे की दौड़ में भागना चाहता हूं, कभी पैसे की दौड़ से खुद को हटाना चाहता हूं. 

एँ जिन्दगी मैं तुझसे क्या चाहता हूं, असमंजस में हूं अब क्या चाहता हूं.

कभी महंगे झूले के मज़े चाहता हूं, कभी पेड़ के नीचे रस्सी का झूला, झूलना चाहता हूं. 

कभी तो नई फिल्म, मॉल में देखना चाहता हूं, कभी दादा – दादी सें कहानी सुनना चाहता हूं. 

एँ जिन्दगी मैं तुझसे क्या चाहता हूं, असमंजस में हूं अब क्या चाहता हूं.

….. बस असमंजस में हूं यह क्या चाहता हूं.

गर्लफ्रेंड

😁😁😁😜😜👌👌
ज़िन्दगी में भले एक गर्लफ्रेंड तक ना हो

फिर भी…

जगजीत सिंह की ग़ज़लें सुनने बैठो तो

लगता है
जैसे 10-12 छोड़ के चली गयी हों…

😜 😜 😜 😜 😜

जगजीत की गजलो को सुनकर
गर्ल फ्रेंड की याद मैं एक घंटे रोया..😂

फिर याद आया मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है..😳

मैं तो शादी शुदा हूं……….💦
दो घंटे फिर रोया..

😄😛😂

उम्र का पानी…

खतरे के
निशान से ऊपर बह रहा है
उम्र का पानी…

वक़्त की बरसात है कि
थमने का नाम नहीं
ले रही…

आज दिल कर रहा था,
बच्चों की तरह रूठ ही जाऊँ,
पर…

फिर सोचा,
उम्र का तकाज़ा है,
मनायेगा कौन…

रखा करो नजदीकियां,
ज़िन्दगी का कुछ भरोसा
नहीं…

फिर मत कहना
चले भी गए
और बताया भी नहीं…

चाहे जिधर से गुज़रिये,
मीठी सी हलचल
मचा दीजिये…

उम्र का हरेक दौर मज़ेदार है,
अपनी उम्र का
मज़ा लिजिये….

*””सदा मुस्कुराते रहिये””*☺

क़त्ल का इल्ज़ाम

रिहा हो गए बा-इज़्ज़त वो
मेरे क़त्ल के इल्ज़ाम से

शोख़ निगाहों को, अदालत ने,
हथियार नहीं माना

जब कभी भी मन उदास होता है

जब कभी भी मन उदास होता है,
तन्हा होने का अहसास होता है,

क्यों ख़ुशी पल में यू रूठ जाती है,
ऐसा क्यों अक्सर मेरे साथ होता है,

मत गिनाना ऐब किसी के भी यंहा,
आइना हर किसी के पास होता है,

तुम छुपा लो गुनाह चाहे कितने भी,
वँहा एकदिन सबका हिसाब होता है,

कैसे जाने कि कौन अपना है,
यंहा हर इक चेहरे पे नकाब होता है,

आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं..!

आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं..!
चाय बनाकर फिर कोई बात करते हैं..!!

उम्र पचास के पार हो गई हमारी..!
बुढ़ापे का इस्तक़बाल करते है..!!

कौन आएगा अब हमको देखने यहां..!
एक दूसरे की देखभाल करते है..!!

बच्चे हमारी पहुंच से अब दूर हो गए..!
आओ फिर से उन्ही को कॉल करते हैं..!!

जिंदगी जो बीत गई सो बीत गई..!
बाकी बची में फिर से प्यार करते हैं..!!

खुदा ने जो भी दिया लाजवाब दिया..!
चलो शुक्रिया उसका बार बार करते हैं..!!

सभी का हाल यही है इस जमाने में..!
ग़ज़ल ये सबके नाम करते है..!!

*50 प्लस के ऊपर के मित्रों को समर्पित!!*