The other way

You got to BE before you can DO.
You got to DO before you can HAVE.
You got to HAVE before you can GIVE.
To be, to do, to have, to give…
is the upward spiral of life.

जब कभी भी मन उदास होता है

जब कभी भी मन उदास होता है,
तन्हा होने का अहसास होता है,

क्यों ख़ुशी पल में यू रूठ जाती है,
ऐसा क्यों अक्सर मेरे साथ होता है,

मत गिनाना ऐब किसी के भी यंहा,
आइना हर किसी के पास होता है,

तुम छुपा लो गुनाह चाहे कितने भी,
वँहा एकदिन सबका हिसाब होता है,

कैसे जाने कि कौन अपना है,
यंहा हर इक चेहरे पे नकाब होता है,

आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं..!

आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं..!
चाय बनाकर फिर कोई बात करते हैं..!!

उम्र पचास के पार हो गई हमारी..!
बुढ़ापे का इस्तक़बाल करते है..!!

कौन आएगा अब हमको देखने यहां..!
एक दूसरे की देखभाल करते है..!!

बच्चे हमारी पहुंच से अब दूर हो गए..!
आओ फिर से उन्ही को कॉल करते हैं..!!

जिंदगी जो बीत गई सो बीत गई..!
बाकी बची में फिर से प्यार करते हैं..!!

खुदा ने जो भी दिया लाजवाब दिया..!
चलो शुक्रिया उसका बार बार करते हैं..!!

सभी का हाल यही है इस जमाने में..!
ग़ज़ल ये सबके नाम करते है..!!

*50 प्लस के ऊपर के मित्रों को समर्पित!!*

ज़िंदगी का रायता..

*हम तन्हा ही चले थे…*
*ज़िंदगी का दही जमाने*
*रास्ते में बूंदियाँ मिलती गईं…*
*और ज़िंदगी का रायता बन गया।*

The Nextworld

Perplexed by fear and soothed by calmness,

Feelings replaced by erroneous code,

A world full of ifs and else,

Nothing to ponder yet everything to express.

Machine learning is what they call,

Possibility of getting better than all,

It isn’t going to be a choice,

It’s going to be our way of life.

Productivity levels all time high,

Profits and margins soaring towards the sky,

Learning curve being as small,

Are we ready for such kinda haul.

Can we replace anger with love,

Will we be able to identify fear,

How will we differentiate ourselves from the rest,

For immortality remains our ultimate quest.

दोस्तो से रिश्ता रखा करो जनाब…

देखी जो नब्ज मेरी,
हँस कर बोला वो हकीम :

“जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ,
तेरे हर मर्ज की दवा वही है।”

दोस्तो से रिश्ता रखा करो जनाब…
ये वो हक़ीम हैं
जो अल्फ़ाज़ से इलाज कर दिया करते हैं।

खींच कर उतार देते हैं उम्र की चादर,
ये कम्बख्त दोस्त…
कभी बूढ़ा नहीं होने देते।

बच्चे वसीयत पूछते हैं,
रिश्ते हैसियत पूछते हैं,
वो दोस्त ही हैं जो
मेरी खैरियत पूछते हैं…..

चांद भी क्या खूब है..

*चांद भी क्या खूब है,…*
*न सर पर घूंघट है,*
*न चेहरे पे बुरका,*
*कभी करवाचौथ का हो गया,*
*तो कभी ईद का,*
*कभी माशूक-ऐ सनम हो गया*
*तो कभी हो गया, मामा*

*ज़मीन पर होता, तो टूटकर विवादों मे होता,*
*अदालत की सुनवाइयों में होता*,
*अखबार की सुर्ख़ियों में होता,*

*शुक्र है आसमान में बादलों की गोद में है,…*
*इसीलिए ज़मीन में कविताओं और ग़ज़लों में महफूज़ है”*

Fiction and Truth

Funny is the way how things work.
The truth is spoken using the medium of fiction.
Fiction is used to hide the truth.
If this is not irony, what is!

Where the mind is without fear

By Rabindranath Tagore,

Where the mind is without fear and the head is held high;
Where knowledge is free;
Where the world has not been broken up into fragments;
By narrow domestic walls;
Where words come out from the depth of truth;
Where tireless striving stretches its arms towards perfection;
Where the clear stream of reason has not lost its way;
Into the dreary desert sand of dead habit;
Where the mind is led forward by thee;
Into ever-widening thought and action;
Into that heaven of freedom, My Father, let my country awake.